माँ विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय में जनभवन के निर्देशानुसार उल्लास के साथ मनाया गया कर्नाटक दिवस, विभिन्न प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभा
मीरजापुर, 1 नवंबर 2026। जनभवन, लखनऊ के निर्देशानुसार माँ विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय, मीरजापुर के अस्थायी परिसर राजकीय महाविद्यालय, उमरियाँ, मझवां में कर्नाटक दिवस के अवसर पर विविध शैक्षिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं का आयोजन उत्साहपूर्वक किया गया। आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों को देश के विभिन्न राज्यों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, भाषा, साहित्य, कला एवं परंपराओं से परिचित कराना तथा उनमें राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक समन्वय एवं विविधता के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति प्रो. शोभा गौड़ एवं उपस्थित अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर तथा दीप प्रज्वलित करके किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. शोभा गौड़ ने कर्नाटक दिवस के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कर्नाटक भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, साहित्यिक परंपरा, कला, संगीत एवं स्थापत्य कला का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। कर्नाटक राज्य का गठन 1 नवंबर 1956 को भाषायी आधार पर मैसूर राज्य के रूप में हुआ था जिसे 1 नवंबर 1973 को कर्नाटक नाम दिया गया। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में प्रत्येक वर्ष 1 नवंबर को कर्नाटक दिवस मनाया जाता है।
उन्होंने कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी विविधता में निहित एकता है। देश के विभिन्न राज्यों की भाषा, संस्कृति एवं परंपराएँ भले ही अलग-अलग हों लेकिन राष्ट्रीय एकता का सूत्र सभी को एक साथ जोड़ता है। राजभवन के निर्देशानुसार आयोजित ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को भारत की विविधतापूर्ण सांस्कृतिक पहचान से जोड़ने तथा उनमें राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक गौरव एवं पारस्परिक सद्भाव की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान प्रदान करना नहीं बल्कि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास करना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी प्रतिभा एवं रचनात्मक क्षमता का उपयोग समाज और राष्ट्र के विकास में करने तथा देश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। कुलपति ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र एवं पदक प्रदान कर सम्मानित किया।

कार्यक्रम के अंतर्गत प्रश्नोत्तरी, भाषण, पोस्टर एवं मॉडल, सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा रंगोली सहित कुल पांच प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं। इन प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग करते हुए अपनी ज्ञानात्मक क्षमता, अभिव्यक्ति कौशल, रचनात्मकता एवं सांस्कृतिक प्रतिभा का परिचय दिया। प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों को कर्नाटक की ऐतिहासिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विशेषताओं से परिचित होने के साथ-साथ अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिला।
प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में एम.ए. प्रथम सेमेस्टर (भूगोल) की उजाला मौर्य ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। कल्पना द्विवेदी, एम.ए. तृतीय सेमेस्टर (भूगोल) एवं रेनू चौहान, एम.ए. प्रथम सेमेस्टर (भूगोल) संयुक्त रूप से द्वितीय स्थान पर रहीं जबकि अर्चना कुमारी, एम.ए. प्रथम सेमेस्टर (भूगोल) ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
भाषण प्रतियोगिता में कल्पना द्विवेदी, एम.ए. तृतीय सेमेस्टर (भूगोल) ने प्रथम, आयुष यादव, एम.कॉम. प्रथम सेमेस्टर ने द्वितीय तथा शीलू पाठक, एम.कॉम. प्रथम सेमेस्टर ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
पोस्टर एवं मॉडल प्रतियोगिता में सौरभ कुमार, एम.ए. भूगोल प्रथम सेमेस्टर, मनीष भारती, एम.ए. शिक्षा शास्त्र तृतीय सेमेस्टर तथा आरती मौर्य, एम.ए. भूगोल प्रथम सेमेस्टर ने अपनी रचनात्मक एवं कलात्मक अभिव्यक्ति प्रस्तुत की। विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए पोस्टर एवं मॉडल के माध्यम से विषयवस्तु को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रतियोगिता में अनामिका, एम.ए. गृह विज्ञान प्रथम सेमेस्टर ने प्रथम, वंदना, एम.कॉम. प्रथम सेमेस्टर ने द्वितीय तथा उजाला, भूगोल प्रथम सेमेस्टर ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
रंगोली प्रतियोगिता में प्रीति यादव, एम.ए. गृह विज्ञान तृतीय सेमेस्टर ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। उजाला, एम.ए. शिक्षा शास्त्र तथा श्याम जीरा, एम.ए. गृह विज्ञान तृतीय सेमेस्टर संयुक्त रूप से द्वितीय स्थान पर रहीं। वहीं आंचल मौर्य, एम.ए. गृह विज्ञान प्रथम सेमेस्टर, प्रिया मौर्य, एम.कॉम. प्रथम सेमेस्टर एवं क्षमा, एम.ए. गृह विज्ञान तृतीय सेमेस्टर ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
इस अवसर पर कुलसचिव राम नारायण, वित्त अधिकारी गिरीश कुमार, सहायक कुलसचिव अखिलेश मिश्र, पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. अतुल किशोर शाही, डॉ. प्रशांत सिंह, डॉ. आशुतोष राय, डॉ. विभा रानी सिंह एवं डॉ. जिया परवीन सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक, कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।


