अन्य पद्य विधा

साधना शाही जी की रचनाएँ | हिन्दी श्री

शब्द की महिमा भाव की अभिव्यक्ति है शब्द,मानो इसको जैसे अब्द।इनसे जुड़कर वाक्य है बनता।मन के भाव जो व्यक्त है करता।आगे बढ़ा तो बन गया लेख,बड़ी- बड़ी घटना का किया उल्लेख।घटना जुड़- जुड़ बन गई पुस्तक,किस्सा-कहानी साथ में मुक्तक।दोहा, सोरठा, रोला इनसे,ग्रंथ ,उपनिषद भी हैं जिनसे।किंतु यदि ना हों विषयोचित,लेख परत बन होते उपेक्षित।उचित जगह […]

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ममतामयी मां की आंचल

ममतामयी मां की आंचल vipin chaube

ममतामयी मां की आंचल – विपिन चौबे कहते हैं मां के ऊपर काव्य लिखना बहुत ही सरल है पर लिखते समय लिखने वाले की लेखनी भी कांप उठती है | मां शब्द जरूर छोटा है परंतु उसका अर्थ उतना ही व्यापक है जितनी के पृथ्वी से सूर्य की दूरी | हर एक युग में मां

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करवा चौथ पर डॉ बीना सिंह “रागी ” की रचना | हिन्दी श्री

बीना सिंह "रागी

करवा चौथ मेरे सर की कसम मैं मिलूंगी सनमआप मिलने का हमसे सौगंध खाईए बाती की भांति मै जलूंगी सनमहर जन्म में दीपक बन आ जाइएकपोल है लाल सुर्ख लाल रुखसार हैहैं अद्भुत ये छवि दर्पण शर्मसार हैकेश काले कटी पर बलखाते हुएबातें करती हूं खुद से सकुचाते हुएधड़कन और सांसों में समा जाइएव्याकुल है मनवा

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बौद्धिवृक्ष के नीचे | अजित कुमार राय | हिन्दी श्री hindi shree

अजित कुमार राय

कविता- बौद्धिवृक्ष के नीचे बौद्धिवृक्ष के नीचे —-मैं तथागत हूँ —-तथा आगत , तथा गत ।बोधिसत्व से बुद्ध बनने की अंतर्यात्रातय होती है असंख्य जन्मों में ।ऊर्ध्वग ज्योति – शिखाएक दिन निर्वाण प्राप्त कर लेती है औरभोर का तारा डूबने के साथ हीकुछ डूब जाता है अपने भीतर ।अपने भीतर देखना ही तो विपश्यना है

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गुरु पूर्णिमा | रचनाएं | हिन्दी श्री पब्लिकेशन

1. गुरु गुरु तुम दीपक मैं अंधकार ,किए हैं मुझपे आप उपकार, पड़ा है मुझपर ज्ञान प्रकाश,बना है जीवन ये उपवास, करें नित मुझ पर बस उपकार ,सजे मेरा जीवन घर द्वार, गुरु से मिले जो ज्ञान नूर,हो जाऊं मैं जहां में मशहूर गुरु से मिले हैं जो मार्गदर्शन,हो गए हैं मुझे भगवान के दर्शन

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चुनाव क्यों और कैसे | Chunav Kyo Aur Kaise | मनोज शर्मा | हिन्दी श्री पब्लिकेशन

chunav-kyo-aur-kaise

चुनाव क्यों और कैसे? ( Chunav Kyo Aur Kaise ) सबसे पहले हमें चुनाव का अर्थ, तात्पर्य तथा परिभाषा को समझना जरूरी है, कि वास्तविकता के ध्येय से चुनाव क्या है ? किसे चुनना है ? क्यों चुनना है ? इस चुनाव से सम्बन्धित व्यक्ति की हमारे भारतवर्ष जैसे गणतांत्रिक देश के लिए क्या जवाबदेही

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योग दिवस पर लिखित रचनाएं | हिन्दी श्री पब्लिकेशन

योग दिवस

1. योग-दिवस जैष्ठ शुक्ल , एकादशी , चंद्रवार की भोरआज विश्व में उठ रहा,योगदिवस का शोरयोगदिवस का शोर , शोर क्या महाशोर हैआज हिन्द के हाथ में जिसकी मूल डोर है योग किया तो शिवशंकर ,महादेव कहलाएउसी योग के बली कन्हैया,योगेश्वर बनपाएयोगेश्वर बन पाए कीना , महायोग हनुमानाउसीयोग से रामदेव को,जाने आज जमाना रामूभैया अकट

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पिता दिवस पर बेहतरीन कवितायें | हिन्दी श्री पब्लिकैशन

पिता दिवस

1. पिता केवल वृक्ष नहीं वटवृक्ष हो तुम।जिस की शाखा मैं वह वृक्ष हो तुम।। तुमने कितने नाजों से हमको पाला है।जब हम टूटे तुम्हीं ने हमें संभाला है।। जब घर से अकेले निकले थे तब भी तेरा साया था।जब पड़ी विपत्ति हम पर तब तुम ही ने संभाला था।। तुम्ही ने बचपन में मेरा

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राहुल भट्ट की 5 रचनाएं | हिन्दी श्री

राहुल भट्ट

राहुल भट्ट (कवि), उत्तराखंड की पाँच रचनाएं -1. शहीद की अंतिम चिट्ठी, 2. पिता की कमी 3. मधुशाला 4. बसंत 5. महामारी 1. शहीद की अन्तिम चिट्ठी धरती पर झूमने, वतन को यू चूमने। जन्मा हूँ मैं इस धरा पर मातृभूमि के लिऐ ।। न समझ ए- जान, तू इश्क मुझको । मैं तो वतन का

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जय तिवारी जी की 5 शानदार रचनाएं | हिन्दी श्री

जय तिवारी

1. परिवार  संस्कृति न जाने कहाँ से कहाँ चली गयी है,अब तो परिवार की परिभाषा ही बदल गयी है।पहले परिवार मे होते थे दश-बारह लोग,अब तो चार मे ही सिमट कर रह गयी है।। चाचा-चाची, दादा-दादी परिवार के ही अंग है,लेकिन वर्तमान मे परिवार ने बदले अब ढंग हैं।माता-पिता और बच्चों तक ही रह गया हो

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