छंद

हर आदमी यह सोचता | 5 मुनि शेखर छन्द | Santosh Kumar Prajapati | Mahoba

संतोष कुमार माधव

हर आदमी यह सोचता,अब कुर्सियों पर राज हो ।
मन का सदा सबके करें,नव साज ही चहुँ साज हो ।।
मुख से कहें कुछ और ये,इनके हिया कुछ और ही ।
मत पा लिए जयश्री मिली,फिर हो गए सिरमौर भी ।।

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दुनियादारी से मिला मुझको ज्ञान महान। गयाप्रसाद मौर्य रजत -आगरा | 5 दोहे | हिंदी श्री

gaya prasad maurya rajat

कोरोना काल में कुछ लोगों की सच्चाई बयान करते बेहतरीन दोहे 1. दुनियादारी से मिला ,मुझको ज्ञान महान।चमचागीरी के बिना,मिले नही पहचान।। 2. मंदिर मूरत सामने ,झुका रहा मैं शीश।मेरे कंधों बैठकर ,उसने पाया ईश। 3. मंद मंद मुस्कान में, छिपे हुए कुछ राज।देख गरीबी हँस रहे ,मेरे अपने आज। 4. जैसी करनी आपकी,वैसा मिलता

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