गद्य

हिन्दी दिवस | कुमारी सृष्टि राज | हिन्दी श्री पब्लिकेशन

कुमारी सृष्टि राज

हिन्दी और हिन्दी दिवस हिन्दी हमारी मातृभाषा है, हिन्दी एक भावपूर्ण भाषा है, जिसके माध्यम से बातों के अंदर की गहराई एवं भावनाओं को बहुत अच्छी तरह से समझा जा सकता है । एक बार महात्मा गांधी जी ने कहा था कि जिस तरह ब्रिटेन में अंग्रेजी बोली जाती है और वहाँ के सारे कामकाज […]

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गीतांजलि श्री से एक मुलाकात | उषा राय | हिन्दी श्री | hindi shree

गीतांजलि श्री_उषा राय

मेरी हिन्दी मेरा धन है- गीतांजलि श्री अपने नए उपन्यास ‘रेत समाधि’की चर्चा के लिए लखनऊ आईं गीतांजलि श्री से मेरी मुलाकात हुई। निःसंन्देह गीतांजलि जी एक असाधारण लेखिका हैं जिसे जीवन के खाँचे और सरलीकरण परेशान करते हैं। वे मानती हैं कि जिन्दगी में कुछ भी निर्धारित नहीं है ,वह इधर से उधर होता

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चुनाव क्यों और कैसे | Chunav Kyo Aur Kaise | मनोज शर्मा | हिन्दी श्री पब्लिकेशन

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चुनाव क्यों और कैसे? ( Chunav Kyo Aur Kaise ) सबसे पहले हमें चुनाव का अर्थ, तात्पर्य तथा परिभाषा को समझना जरूरी है, कि वास्तविकता के ध्येय से चुनाव क्या है ? किसे चुनना है ? क्यों चुनना है ? इस चुनाव से सम्बन्धित व्यक्ति की हमारे भारतवर्ष जैसे गणतांत्रिक देश के लिए क्या जवाबदेही

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गद्य की कई अन्य विधाये

निबंध, कहानी, लघुकथा के अतिरिक्त गद्य की कई अन्य विधाये भी है जैसे – जीवनी, संस्मरण, रिपोर्ताज, नाटक, एकांकी, उपन्यास, रेखाचित्र आदि। गद्य की इन् विभिन विधाओं में लिखी रचनाये इस केटेगरी में उपलबध हैं।

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लघुकथा

कहानियों का छोटा रूप “लघुकथा” वर्तमान में बहुत प्रचलित हो रहा है।  आजकल लोगों के पास समय का बहुत अभाव है।  ऐसे में लोग लम्बी कहानियों से लघुकथाओं की ओर विमुख होने लगे हैं।  कुछ पंक्तियों में सन्देश या भावों को लघु कथाओं में बढ़ी निपुणता के साथ समाहित किया जाता है।  शायद इसीलिए लघुकथाएं

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निबंध

कहानी, लघुकथा व अन्य गद्य विधाओं की तरह निबंध भी लोगो के ऊपर अपना प्रभाव छोड़ने में सक्षम है।  शिवप्रसाद “सितारे हिन्द”, भारतेन्दु हरीशचंद्र, बालकृष्ण भट्ट, महावीरप्रसाद द्रिवेदी, आचार्य रामचंद्र शुकल, सरदार पूर्णसिंह, प्रताप नारायण मिश्र, प्रेमधन, श्यामसुन्दर दास, बेचें शर्मा उग्र, महादेवी वर्मा, हजारीप्रसाद द्रिवेदी, अमृत राय और विद्यानिवास मिश्र जैसे निबंधकारों ने हिंदी

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कहानी

कहानियाँ प्राचीन काल से ही बच्चों से लेकर बूढ़ों तक की पसंद रही हैं।  पहले दादी – नानी के द्वारा सुनाई जाने वाली काहनियाँ या कथाओं को बच्चे बड़े चाव से सुनते थे।  तब कहानियाँ नैतिक मूल्यों को समेटे हुए काल्पनिक घटनाओं पर आधारित होती थीं। वर्तमान में कहानी लेखन में बहुत बदलाव आया है। 

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