दिलदारनगर। हिंदी के वरिष्ठ कथाकार आनंद कुशवाहा की 11वीं कृति मुट्ठी भर सुकून कथा संग्रह का लोकार्पण गाजीपुर की प्रतिष्ठित संस्था उद्धव के तत्वावधान में दिलदारनगर के तथागत मैरिज हॉल में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार राजेंद्र सिंह ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हिंदी श्री के संस्थापक और वरिष्ठ कथाकार आनंद अमित रहे। कार्यक्रम का आरंभ पहले सत्र में अतिथियों द्वारा भगवान गौतम बुद्ध तथा माता सावित्रीबाई फूले के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। तदोपरांत अतिथियों के स्वागत के बाद लोकार्पण संपन्न हुआ । कार्यक्रम का संचालन कवि कुमार प्रवीण ने किया।

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में आधार वक्तव्य देते हुए सुनील सुकुमार ने कहा कि आनंद कुशवाहा जमीन से जुड़े रचनाकार हैं उनकी कहानियों से मिट्टी की खुशबू आती है । वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय आरा के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ विकास यादव ने कहा कि आनंद कुशवाहा शादी विवाह जैसे प्रकरणों से कहानी उठाते हैं और उनमें सामाजिक सरोकार भरते हैं। दहेज आदि मुद्दों के लिए सलीके से ताना बाना बुनते हैं । पूर्व सांसद जगदीश कुशवाहा ने कहा कि मुट्ठी में बहुत ताकत होती है । यही ताकत सुकून लाती है । कवि मिथिलेश गहमरी ने काव्यात्मक शैली में कहा कि आनंद कुशवाहा दायरे को तोड़ते हुए समता मूलक समाज की रचना करने में विश्वास करते हैं । हिंदू पीजी कॉलेज जमानिया के प्राचार्य डॉक्टर श्रीनिवास सिंह ने साहित्य को विज्ञान से जोड़ते हुए आनंद कुशवाहा को वैज्ञानिक सोच वाला साहित्यकार बताया।
एम ए एच इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य खालिद आमिर जी आनंद कुशवाहा की रचना धर्मिता पर भावुक दिखे। उन्होंने आनंद कुशवाहा को आधुनिक प्रेमचंद की संज्ञा दी । समकालीन सोच पत्रिका के संपादक रामनगीना कुशवाहा ने आनंद कुशवाहा को शेक्सपियर से जोड़ते हुए कहा कि साहित्यकार हमेशा ज्वलंत मुद्दों पर कलम उठाता है भले ही उसे प्रतिरोध झेलना पड़ता है। मुख्य अतिथि अमित आनंद ने कहा कि आनंद कुशवाहा की कहानियों के कथानक में विविधता है वह वर्णनात्मक, संवादात्मक विश्लेषणात्मक, आत्मकथात्मक आदि शैलियों में रचना कर्म करते हैं । इनकी भाषा सरल सुबोध और ग्राह्य है। उनके नायक तर्क में विश्वास करते हैं और व्यवस्था पर चोट करते हैं। उनकी कहानियों में अंत तक रोमांच बना रहता है ।

कार्यक्रम में हिंदी श्री साहित्यिक संस्थान द्वारा आनंद कुशवाहा को हिंदी श्री साहित्य सम्मान से विभूषित किया गया ।अपने उद्बोधन में आनंद कुशवाहा ने कहा कि मैं कहानियों को लिखा नहीं है बल्कि वह समाज में फैली थी जिन्हें मैंने सिर्फ बटोरा है । अध्यक्ष राजेंद्र सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि पहले कहानी दादी नानी द्वारा सुनाई जाती थी परंतु अब कहानी सोए हुए को जगाने के लिए लिखी जा रही है और यह कार्य आनंद कुशवाहा बखूबी कर रहे हैं । कार्यक्रम में सुहेल खान, डॉक्टर शंभू नाथ सिंह, दामोदर दबंग, कुमार शैलेंद्र, लाल जी सिंह, श्याम नारायण कुशवाहा, राम सिंह यादव, अरुण शुक्ला आदि लोग उपस्थित थे। अंत में सभी का धन्यवाद आनंद कुशवाहा ने व्यक्त किया।
