हिन्दी श्री साहित्य संस्थान की काव्य गोष्ठी मे राजेश राज का हुआ सम्मान

हिन्दी श्री साहित्य संस्थान काव्य गोष्ठी
हिन्दी श्री साहित्य संस्थान काव्य गोष्ठी 2

राम जागें सदा रावण को सुलाए रखिए- राजेश राज ने हिन्दी श्री साहित्य संस्थान की काव्य गोष्ठी में पढ़ी कविता, हुए सम्मानित

मिर्जापुर। शारदीय नवरात्रि व दशहरा के उपलक्ष्य में हिंदी श्री साहित्य संस्थान के सौजन्य से अनगढ़ रोड सृष्टि राज के आवास पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोरखपुर से पधारे प्रसिद्ध कवि व आशु संचालक राजेश राज और उनकी धर्मपत्नी नीलम श्रीवास्तव मुख्य अतिथि रहे। उनका स्वागत अंग वस्त्रम वह स्मृति चिन्ह देकर मिर्जापुर के कवियों व कवयित्रियों ने किया।

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कार्यक्रम का प्रारंभ सरस्वती वंदना से इला जायसवाल ने किया। मुख्य अतिथि राजेश राज ने अपने वक्तव्य में कहा कि हमें अपने अन्दर के राम को जगाकर रखना होगा और रावण को सुलाकर। उन्होंने सुनाया – दीप तुलसी की तरह एक जलाये रखिए। अपने मानस में उजाले को बसाए रखिए। राम रावण सदा हर दिल में रहा करते हैं। राम जागें सदा रावण को सुलाए रखिए। काव्यपाठ के क्रम में आनंद अमित ने सुनाया – रोशन मेरा घर कर देना दीवाली में अबकी चंदा। दीपक जला नहीं पाऊंगा कंगाली में अबकी चंदा। अनिल यादव ने पढ़ा – आंखों को तसल्ली मिलती है बहुत यकीनन। चेहरे चेहरे यहां मुस्कान सजाए हुए हैं। नीलम श्रीवास्तव ने कहा इस प्रकार की कवि गोष्ठियां सुखद अनुभव देती हैं। नंदिनी वर्मा ने सुनाया – ऐ मनुज तू अपनी शक्ति को जरा पहचान ले। बाजुओं में बल है फिर तू क्यों भला एहसान ले। विजय श्रीवास्तव ने पढ़ा – हे आदि पुरुष ले मनुज रूप जग को मर्यादा बतलाया। पग पद पर सदाचार पावन चरित्र से सिखलाया। इला जायसवाल ने पढ़ा – जय जय हे मां वीणा पाणी।

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कार्यक्रम के अंत में कवयित्री सृष्टि राज ने सभी का धन्यवाद प्रकट किया। सावित्री कुमारी, यामिनी, मयंक आदि उपस्थित रहे।

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