हवाओं में जहर है पुस्तक का हुआ विमोचन

हवाओं में जहर है

पुकार ग़ाज़ीपुरी के ग़ज़ल संग्रह “हवाओं में ज़हर है” का विमोचन सह काव्य गोष्ठी का भव्य आयोजन

कार्यक्रम की अध्यक्षता साहित्य सौरभ परिषद के संस्थापक वरिष्ठ साहित्यकार राजेंद्र सिंह ने की। मुख्य अतिथि वरिष्ठ महाकाव्यकार, पूर्व प्रधानाचार्य कामेश्वर द्विवेदी एवं महाविद्यालय के प्राचार्य प्राचार्य प्रो. श्री निवास सिंह, विजय शंकर पाण्डेय (वाराणसी), चंद्रिका प्रसाद पाण्डेय ‘अनुरागी’ (कोलकाता), गिरीश पाण्डेय ‘काशिकेय’ ( वाराणसी), आनंद अमित प्रजापति (मिर्जापुर), डाॅ राजेन्द्र भारती (बलिया) विशिष्ट अतिथियों ने कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिया। समारोह का शुभारंभ मां भारती के तैल चित्र पर पुष्प गुच्छ से हुआ। इसके पश्चात सभी आमंत्रित विद्वतजनों का माल्यार्पण एवं उत्तरी/ अंगवस्त्रम प्रदान कर सम्मानित किया गया।हिन्दी साहित्य संस्थान के तरफ से पुकार ग़ाज़ीपुरी को “देव श्री” सम्मान से सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि कामेश्वर द्विवेदी ने अपने संबोधन में कहा कि आज विमोचित हो रहे गज़ल संग्रह “हवाओं में ज़हर है” में पुकार गाजीपुरी जी ने आज के समाज की सच्चाई को अभिव्यक्ति दी है। आज के समय की विसंगति यह है कि वातावरण के साथ-साथ सामाजिक ताना-बाना भी बिखरता जा रहा है लेकिन सुखद पहलू यह है कि राम पुकार जी की रचनाओं में सामाजिक समरसता को बढ़ाने की बहुत संभावनाएं विद्यमान हैं। साहित्यकार एवं शिक्षिका डॉ. ऋचा राय ने मुख्य वक्ता के रूप में अपना बीज वक्तव्य देते हुए कहा कि “पुकार गाजीपुरी ने अपनी ग़ज़लों में जीवन की तमाम समस्याओं को सुलझाने का प्रयास किया है।” सुकंठ कवि एवं युवा गायक कृष्णा मिठ्ठू ने पुकार ग़ाज़ीपुरी द्वारा विरचित सरस्वती वंदना की अपने स्वर में मधुर प्रस्तुति से काव्य गोष्ठी का आगाज किया तो मानो स्वर लहरियां फूट पड़ीं और श्रोता झूम उठे।

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इस सारस्वत यज्ञ को अपनी मेधा और वैदुष्य से कई रचनाकारों ने स्वरचित मुक्तक, गीत, ग़ज़ल-अग़ज़ल, गद्य कविता, चौपाई और दोहा सुना कर सभागार में उपस्थित सभी साहित्य प्रेमियों को मंत्रमुग्ध करके खूब वाहवाही लूटी। काव्य गोष्ठी में भाग लेने वाले सुधि रचनाकारों में आयुर्वेद के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हेतु राष्ट्रपति से पुरस्कृत एवं सम्मानित रंग बहादुर सिंह, वरिष्ठ कवि इंजीनियर हरि शंकर पाण्डेय, एडवोकेट एवं प्रखर वक्ता तथा जन चेतना के कवि दामोदर दबंग, शिक्षक एवं कवि नगेन्द्र दूबे, स्नातक की छात्रा एवं कवयित्री हर्षिता दूबे, सेवा निवृत्त शिक्षक एवं कवि महेन्द्र प्रसाद सिंह सहित गणमान्य कवि एवं साहित्यकारों ने अपनी प्रस्तुति दी।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में सौरभ साहित्य परिषद बरूइन जमानियां गाज़ीपुर के वरिष्ठ साहित्यकार राजेंद्र सिंह ने कहा कि “सत्तर के दशक में दुष्यंत कुमार के आगमन से हिंदी ग़ज़ल को एक नई पहचान और दिशा मिली। उन्होंने ग़ज़ल को राजदरबारों और महफिलों के रूमानी माहौल से बाहर निकालकर ‘जन-जीवन के आंगन’ और आम आदमी के संघर्ष से जोड़ दिया था आज सुखद और गौरव की अनुभूति के साथ मैं यह कह सकता हूं कि राम पुकार सिंह उर्फ पुकार गाजीपुरी जी ने इसी परंपरा को आगे बढ़ाकर सामाजिक समरसता को ऊर्जा प्रदान करते हुए मानवीय सरोकारों का एक बड़ा काम किया है।”

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कार्यक्रम का सफल संचालन महाविद्यालय के वरिष्ठ आचार्य एवं हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. अखिलेश कुमार शर्मा ‘शास्त्री’ एवं महाविद्यालय के मीडिया प्रभारी एवं सहायक आचार्य हिंदी डॉ. अभिषेक तिवारी ने संयुक्त रूप से किया। अभ्यागतों के प्रति धन्यवाद ज्ञापन महाविद्यालय के पुरा छात्र एवं ग़ज़लकार रामपुकार सिंह उर्फ पुकार ग़ाज़ीपुरी ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के आईक्यूएसी प्रभारी एवं रसायन विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. अरुण कुमार, इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. संजय कुमार सिंह, अर्थशास्त्र के सहायक आचार्य द्वय डॉ. जितेन्द्र कुमार सिंह, डॉ. ओमप्रकाश लाल श्रीवास्तव, भौतिकी विभागाध्यक्ष डॉ. महेन्द्र कुमार, प्रदीप कुमार सिंह मनोज कुमार सिंह, ज्योतिष के प्रतिष्ठित आचार्य एवं साहित्यकार डाॅ राम प्रकाश उपाध्याय, चन्द्र भूषण सिंह, मनोज कुमार गुप्ता स्टेशन बाजार के परामर्श चिकित्सक डॉ. सुरेश राय सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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