गद्य की कई अन्य विधाये
निबंध, कहानी, लघुकथा के अतिरिक्त गद्य की कई अन्य विधाये भी है जैसे – जीवनी, संस्मरण, रिपोर्ताज, नाटक, एकांकी, उपन्यास, रेखाचित्र आदि। गद्य की इन् विभिन विधाओं में लिखी रचनाये इस केटेगरी में उपलबध हैं।
निबंध, कहानी, लघुकथा के अतिरिक्त गद्य की कई अन्य विधाये भी है जैसे – जीवनी, संस्मरण, रिपोर्ताज, नाटक, एकांकी, उपन्यास, रेखाचित्र आदि। गद्य की इन् विभिन विधाओं में लिखी रचनाये इस केटेगरी में उपलबध हैं।
कहानियों का छोटा रूप “लघुकथा” वर्तमान में बहुत प्रचलित हो रहा है। आजकल लोगों के पास समय का बहुत अभाव है। ऐसे में लोग लम्बी कहानियों से लघुकथाओं की ओर विमुख होने लगे हैं। कुछ पंक्तियों में सन्देश या भावों को लघु कथाओं में बढ़ी निपुणता के साथ समाहित किया जाता है। शायद इसीलिए लघुकथाएं
कहानी, लघुकथा व अन्य गद्य विधाओं की तरह निबंध भी लोगो के ऊपर अपना प्रभाव छोड़ने में सक्षम है। शिवप्रसाद “सितारे हिन्द”, भारतेन्दु हरीशचंद्र, बालकृष्ण भट्ट, महावीरप्रसाद द्रिवेदी, आचार्य रामचंद्र शुकल, सरदार पूर्णसिंह, प्रताप नारायण मिश्र, प्रेमधन, श्यामसुन्दर दास, बेचें शर्मा उग्र, महादेवी वर्मा, हजारीप्रसाद द्रिवेदी, अमृत राय और विद्यानिवास मिश्र जैसे निबंधकारों ने हिंदी
कहानियाँ प्राचीन काल से ही बच्चों से लेकर बूढ़ों तक की पसंद रही हैं। पहले दादी – नानी के द्वारा सुनाई जाने वाली काहनियाँ या कथाओं को बच्चे बड़े चाव से सुनते थे। तब कहानियाँ नैतिक मूल्यों को समेटे हुए काल्पनिक घटनाओं पर आधारित होती थीं। वर्तमान में कहानी लेखन में बहुत बदलाव आया है।
आनंद अमित –निकल न पायाहलधर घर से।मेघा रे तुमइतना बरसे। डूब चुकी हैंफसलें सारी ।पानी से हैभरी उसारी ।झरना बहताहै छप्पर से ।मेघा रे तुमइतना बरसे । बाल-ग्वाल हैंकितने आकुल ।टूट चुका हैलकड़ी का पुल ।सागर बहतादिखे नहर से ।मेघा रे तुमइतना बरसे । तोड़ बन्ध कोसुरसरि का जल।ग्राम – वक्ष परबहता कल-कल।त्राहिमाम हैतेरे डर
मिटी रंजिशें अब मिटा खार सीते।हमारी अयोध्या है गुलज़ार सीते। हरिक पथ सजा है, सजी हर गली है।कहीं फूल बिखरे, कहीं पर कली है।लिए हाथ में सब खड़े हार सीते।हमारी अयोध्या है गुलज़ार सीते। है सरयू के तट पर सजी दीप-माला ।सजे देव आलय, सजा है शिवाला ।सभी घर सजे हैं, सजे द्वार सीते ।हमारी
नवगीत एक परिचय – प्रसिद्ध नवगीतकार दौलत राम प्रजापति जी नए रचनाकारों के मन में एक प्रश्न सहज ही आता है कि नवगीत क्या है क्या इसे गीत से अलग विधा माना जाय या नहीं तो इसके लिए आपको ज्यादा सिर खपाने की जरूरत नही बस इतना समझ लीजिए कि नवगीत एक समसामयिक विधा है
कुछ एहसास ऐसे होते हैं जिन्हें कलमबद्ध करके मन को असीम शांति और सुख की अनुभूति होती है। वी पी प्रजापति जी ने भी “कुछ एहसास” के माध्यम से उसी सुख-शान्ति को प्राप्त करना चाहा है। “कुछ एहसास” एक ऐसा काव्य संग्रह है जिसमें वी पी प्रजापति जी ने अपने साथ कार्य करने वाले अधिकारियों
आनंद अमित की कहानियों का संकलन है “रेलवे फाटक” “रेलवे फाटक” कहानी संकलन ग़ाज़ीपुर, उत्तर प्रदेश के कवी व् लेखक आनंद अमित जो की वर्तमान में मिर्ज़ापुर में रह रहे हैं, की कहानियों का संग्रह है। इस कहानी संकलन में छाता, दादी अम्मा के सिक्के, रेलवे फाटक, सूनी छत, कच्ची मिटटी, धुंध और आज़ादी के